थपकियाँ 😴😴

अब वो थपकियो वाली राते  कहाँ
गाने सुनकर सो जाता हूँ
अब लोरियो वाली बातें कहाँ
Screen पर उँगलिया चलती हे 
बालों पर अब कोई जाती कहाँ
अब कोई देखता नही रात में जागकर 
कहाँ चादर हे कहाँ सिर हे 
तो लाते कहाँ
अब कोई ख़ुद जागकर 
हमें सुलाता कहाँ
सब्ज़ी कम पड़ गई तो चल जाता हे 
अब हम वक़्त पर खाना खाते कहाँ
फिर भी माँ सब जानती हे 
हम सच ख़ुद कुछ बताते कहाँ...
ठंड लग रही हे कोन उठकर पंखा slow करे 
तभी फिर याद आया 
बेटा प्रिन्स अब वो थपकियो वाली राते कहाँ....!
                         


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