आवारा हूँ मैं।

नाकारा आवारा और नागवारा हूँ मैं
जिसे बैल भी ना खाये वो चारा हूँ मैं
सूरत कुछ ख़ास नही 
पर सीरे से भरा सारा हूँ मैं
सब कुछ तो हे किस बात की कमी हे 
समझ नही आता किस तरह का बेचारा हूँ मैं
जिसे हमने छत समझा वो छाता निकले 
इसलिए शायद बेसहारा हूँ मैं 
अब सुनो ग़ौर से 
मैं ज़हर नही पर हाँ पारा हूँ मैं
इसीलिए सबसे न्यारा हूँ मैं
हालातों से तो जीत जाऊँगा 
पर ख़ुद ही ख़ुद से हारा हूँ मैं
आज हूँ कल का पता नही 
मैं गणित का नही 
वक़्त का नौ दो ग्यारहा हूँ मैं
अच्छे वक़्त से धुतकारा हूँ 
और हर बुरे वक़्त का दुबारा हूँ मैं

नाकारा आवारा और नागवारा हूँ मैं..

Comments

Popular posts from this blog

3 Business Ideas for Students

Puffs of mr. golly🤭

Health tips for youngsters to stay fit during Corona